Oh my God

हे प्रभु…मेरा अब इस दुनिया में दिल नहीं लगता…मुझे अपने चरणों में स्थान दो, मुझे अपनी गोद में सुला लो..शांत..चिर निंद्रा…हमेशा के लिए…हर झंझट हर तनाव से मुक्त…
उत्तर— जब तीसरा भाव (mental strength, will power) कमज़ोर होता है और बारहवां भाव ( doing of nothing, मोक्ष)एक्टिव होता है तो ये situation create होती है
धर्म अर्थ काम मोक्ष आदि के बंटवारे में 4,8,12 मोक्ष के भाव हैं…4 सुख भाव है माता का सुख, जीव माता की गोद में सुख तलाशता है..
8 भाव uterus का भाव है गर्भ का भाव,..नया जन्म पाने से पहले जीव यहां विश्राम करता है..
12 भाव कुंडली का अंतिम भाव यहां जातक पूर्ण विश्राम चाहता है, जीवन की आपा धापी से मुक्त, जन्म जन्मान्तरों से मोक्ष, प्रभु के चरणों में, अपने इष्ट की गोद मे चिर निद्रा का भाव…
यदि तीसरा भाव कमज़ोर होकर बारहवां भाव एक्टिव हो और दशा भुक्ति 1,8 से भी जुड़ी हो तो जातक आत्महत्या भी कर सकता है.
आठवां भाव मृत्यु का कारण बताएगा..अगर ये भाव 1,8 और मंगल शनि से जुड़े हों तो दुर्घटना योग बनता है और इस स्तिथि में जब गोचर भी tally करे तो जातक आत्महत्या कर लेगा…
उपाय के तौर पर ऐसी स्तिथि में 3,11 भाव को एक्टिव करें…3 will power के लिये और 11 बारहवें को negate करने के लिए…3,11 मित्र और भाई बहन के भाव हैं,…उनका स्नेह ऐसी situation से निकालने में सहायता कर सकता है …
मेरी उलझन है कि आत्महत्या प्रारब्ध में लिखी है, आत्महत्या मृत्यु का ही एक प्रकार है और मृत्यु भगवान के हाथ है तो इंसान दोषी कैसे…किसी मित्र को समझ हो तो मुझे भी समझाना…